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कॉरपोरेट जगत में भी #1EK स्वामीनाथन की है जरूरत

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कृषि वैज्ञानिक डॉ. एमएस स्वामीनाथन... बोले तो भारत की हरित क्रांति के जनक; इस दुनिया से रुखस्त भले हो गए हों लेकिन उनके किए गए काम से चमक रहा उनका नाम सदैव के लिए अमर हो चुका है। भारत की जनसंख्या आज विश्व में सर्वाधिक मानी जा रही है लेकिन देश खाद्यान्न उत्पादन में आत्मनिर्भर है, तो इसका श्रेय डॉ. स्वामीनाथन, अमेरिका के महान कृषि वैज्ञानिक नॉर्मन बोरलॉग और उनके साथी कृषि वैज्ञानिकों को दिया जाता है। डॉ. स्वामीनाथन और बोरलॉग के नेतृत्व में हुए अनुसंधानों के चलते बीमारियों से लड़ सकने वाली गेहूं तथा बाजरा के नए उन्नतशील किस्म के बीज विकसित किए गए थे। गौरतलब है कि दिल्ली स्थित भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र, पूसा में यह अनुसंधान किया गया था। यहां पर उल्लेखनीय है कि ये वैज्ञानिक अपने गहन शोध के दौरान इस निष्कर्ष पर पहुंचे थे कि यदि पौधे की लंबाई कम कर दी जाए, तो इससे बची हुई ऊर्जा उसके बीजों में लग सकेगी। इससे कुल फसल की पैदावार बढ़ेगी। इनकी सोच रंग लाई और एक हेक्टेयर में दोगुना गेहूं की पैदावार संभव हो गई। पहले जहां करीब 20 क्विंटल गेहूं की फसल किसान ले पाता था, अब यह पैदावार करीब 40 कि्व...

_कब सुनेंगे दिल की... बढ़ रहा हृदयघात का खतरा ... आइये सुनते हैं हम दिल की

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तारीख 29 सितंबर.... बोले तो विश्व हृदय दिवस (वर्ल्ड हार्ट डे)... यह खास दिन हमें हृदय स्वास्थ्य के महत्व को याद दिलाने का मौका देता है। पूरी दुनिया में डॉक्टर समझाते हैं कि हृदयघात का खतरा बढ़ रहा है। इसलिए दिल की सुनना शुरू करें... दिल ने यदि सुनना बंद कर दिया तो... आप फिर कभी सुन नहीं पाएंगे। हाल के दिनों में तमाम शख्सियतें हृदय रोग की वजह से अचानक दुनिया से रुखस्त हो गईं। अचानक खबर आई और लोग सकते में पहुंच गए। अरे, यह क्या हो गया। इतनी जल्दी वह दुनिया से चला गया। जी हां, हृदय रोग ऐसा ही है। यह किसी को भी मौका नहीं देता। अचानक हृदय रुक जाता है और जीवन खत्म। 29 सितंबर बहुत खास दिन है, जब हमसे हृदय की समस्याओं को सुनने के लिए आग्रह किया जाता है। गौरतलब है कि दुनिया में पहली बार विश्व हृदय दिवस 24 सितंबर 2000 को मनाया गया था। विश्व स्वास्थ्य महासंघ के पूर्व अध्यक्ष एंटोनी बार्ड डी लूना को इसे मनाने का विचार आया। इस पर उन्होंने #1EK रिपोर्ट पेश की, जिसे अपना लिया गया और वर्ष 2000 में हृदय दिवस मनाया गया। विश्व हृदय दिवस मूल रूप से (2011 तक) सितंबर के आखिरी रविवार को मनाया जाता था, लेकि...

चर्चा का बाजार गर्म हो गया.... हिंदी का महज #1EK शब्द ‘भारत’ लिखा तो...

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चर्चा का बाजार गर्म हो गया.... हिंदी का महज #1EK शब्द ‘भारत’ लिखा तो... हर वर्ष की भांति पुनः 14 सितंबर अर्थात हिंदी दिवस का अवतरण दिवस आ ही गया... और जगह-जगह हिंदी की बेहतरी के लिए जुबानी चर्चाएं की जाएगी। इसके बाद विश्व हिंदी दिवस बोले तो 10 जनवरी तक सब शांत हो जाएंगे। इस दिन फिर हिंदी के समर्थन में आयोजन होंगे और यह क्रम आगे भी चलता रहेगा। लेकिन... जरा ठहरें... अबकी 14 सितंबर का हिंदी दिवस कुछ खास है... और यदि हम चाहें तो इसे ज्वलंत भी बना सकते हैं...। कौतूहल बोले तो सस्पेंस खत्म करते हुए अपनी बात कहता हूं कि भारत सरकार ने जी-20 बैठक के दौरान ‘इंडिया’ की जगह लिखा हिंदी का महज #1EK शब्द ‘भारत’ क्या लिखा... चर्चा का बाजार गर्म हो गया। मेरा तो हिंदी दिवस उसी दिन से शुरू हो गया जब इंडिया दैट इज ‘भारत’ हिंदी न्यूज चैनलों में चर्चा पा रहा था। मुझे किसी भी भाषा से परहेज नहीं है लेकिन हिंदी का बढ़ता फलक दिल को सुकून जरूर देता है। उसकी आकाशगंगा का विस्तार हो रहा है... यह हम हिंदुस्तानियों के लिए गर्व का विषय होना चाहिए। हमारे यहां पर शब्दों को ब्रह्म कहा गया है और ब्रह्म तो #1EK है... ...

#1EK जानकारी : ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में सेल्फी (Selfie)... शब्द कब शामिल किया गया

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आज के दौर में लगभग हर हाथ में मोबाइल है और सेल्फी (Selfie) लेना लोगों का शगल... लेकिन क्या आप जानते हैं कि दुनिया की पहली सेल्फी किसने ली थी.. अंतरिक्ष में खीची पहली सेल्फी कितने में बिकी... और ऑक्सफोर्ड डिक्शनरी में सेल्फी (Selfie) शब्द कब शामिल किया गया?... चलिए हम आपको ऐसे कई तथ्यों की जानकारी देते हैं। सेल्फी को अंग्रेजी के शब्द 'Self' से लिया गया है और इसका मतलब होता है कि खुद के द्वारा खींची गई फोटो। आज Selfie को मोबाइल फोन के फ्रंट कैमरा से लिया जाता है लेकिन जब मोबाइल नहीं थे... तब क्या? तो आपको जानकारी के लिए बता दूं... पहली सेल्फी मोबाइल के आने से काफी समय पहले ही ले ली गई थी...। हैरान न हों....। पहले सेल्फी के बारे में जान लें... इसे सेल्फ पोट्रेट self-portrait बोले तो खुद की तस्वीर बनाना कह सकते हैं लेकिन खुद कोई अपनी फोटो कैसे बनाएगा.. यह तो बड़ा कठिन है लेकिन मोबाइल ने इस कठिनाई को दूर कर दिया है। सेल्फी खींचना अब साधारण है... बस क्लिक करने की देर है और आप सेल्फी में कैद...। हर मोबाइल फोन में कैमरा है.. और इसमें सेल्फी मोड में करने भर की देर है और नतीजा ... आपक...

आपका कुछ निजी नहीं है... इंटरनेट की दुनिया में

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इतना समझ लीजिए कि आपका निजी कुछ भी नहीं है सब एक लाइन में भागे जा रहे हैं... कॉपी-पेस्ट करें जा रहे हैं... मैं खुराफातीलाल बोले तो डॉ. श्याम प्रीति आपको सचेत कर रहा हूं.... अरे साहब, इंटरनेट की दुनिया में इतना समझ लीजिए कि आपका निजी कुछ भी नहीं है जो भी है सार्वजनिक है तो आप किसी रोक रहे हैं। जब आप स्वयं अपनी जानकारियां आदि सब कुछ दुनिया को बांट रहे हैं तो फिर नोटिस किसे दे रहे हैं। नोटिस तो आपको खुद लेना होगा कि क्या दुनिया को देना है और क्या नहीं देना है। यह आपका अधिकार नहीं बुद्धि विवेक हैं कि दुनिया को आप क्या बताना चाहते हैं.. बोले तो अपना क्या-क्या राज सार्वजनिक करना चाहते हैं। मेरा स्पष्ट मानना है कि हिंदुस्तान... भेड़िया धसान... जिसने भी लिखा होगा, वह बहुत बुद्धिमान होगा। यही आज फिर देखने को मिल रहा है। फेसबुक का नियम बदल रहा है... यह जुमला हर कोई बक रहा है। मुझ जैसे बुड़बक को यह समझ नहीं आ रहा कि लोगों को यह क्या हो गया है। सब खाना खाना भूलकर खुद को बचाने के लिए चिल्ला रहे हैं लेकिन हुजूर जब आपने अपनी निजी जानकारियां स्वयं दुनिया वालों को बांट रखी हो तो उसका जिम्मेदार कौन इहो...

नेता, न्यूज एंकर और मोबाइल.... तीनों ढपोरशंख के भाई

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आभासी दुनिया के धुरंधरों, अर्जुन और बिना गुरु के एकलव्यों...! आप सभी को मेरा राम-राम, सलाम और सश्रियकाल... बोले तो जयहिंद इंकलाब...! मैं हूं खुराफातीलाल। तो हे पार्थ...! मैं ढपोरशंख... नाम तो सुना होगा आपने...! नहीं सुना तो जान लें मेरे बारे में... “अहम् ढपोर शंखनम् वदामि च ददामि न... अर्थात मैं ढपोर शंख... समय की भांति महज सुनाता भर हूं क्योंकि मैं #1EK विचार हूं... इसलिए मुझे सुनकर आप सोचिएगा जरूर। हे पार्थ...! मेरा परिचय जानने के बाद आप मेरे संबंधियों के बारे में जानना चाहेंगे तो कान खोलकर और दिमाग सि्थर कर सुनिए ढपोरशंख की वाणी...! नेता, न्यूज एंकर और मोबाइल... तीनों मुझ नाचीज के हैं छोटे भाई और हमारी इकलौती बहन है आम जनता, लेकिन उसका घनत्व कुछ ज्यादा ही है। रक्षाबंधन हो या भाईदूज वह हमेशा हमारा सम्मान करती है और हम भी उसे बहुत प्यार करते हैं। हमेशा उसे आश्वासन के झूलों में झुलाते रहते हैं...! लेकिन वह कभी भी हमें प्यार करना नहीं छोड़ती क्योंकि वह हम पर विश्वास करती है और हम भी उसी के सहारे चल रहे हैं। अपने छोटे भाइयों के साथ मैं ढपोरशंख शपथपूर्वक कहता हूं कि आम जनता के बिना हम क...

चंद्रमा पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में सबसे पहले निधन किसका हुआ....

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क्या आप जानते हैं कि चांद पर सबसे पहले कौन गया था... मुझे पता कि आपको इस सवाल का जवाब मालूम है... नील आर्मस्ट्रांग .... लेकिन क्या आप जानते हैं कि चंद्रमा पर जाने वाले अंतरिक्ष यात्रियों में सबसे पहले निधन किसका हुआ....? तो आप निश्चित रूप से जवाब नहीं दे पाएंगे... और इसी प्रकार दूसरे चांद यात्री का नाम पूछूंगा तो भी शायद आप ना में अपना सिर हिला दें। दोस्तों, जीके शब्द बहुत छोटा है बोले तो जनरल नॉलेज, लेकिन इसका विस्तार अंतरिक्ष सरीखा ही है। खैर, मुद्दे की बात करते हैं तो... दुनिया के अब तक 12 लोग ऐसे हैं, जो चांद का दीदार वहां पर जाकर कर चुके हैं। इनमें पहला नाम नील आर्मस्ट्रांग का है तो दूसरा नाम है बज एल्ड्रिन। बज एल्ड्रिन के नाम भी #1EK रिकॉर्ड है, वह अगले लेख में पढ़िएगा...! खैर, चांद पर अब तक जाने वाले 12 तीर्थयात्रियों में सबसे पहले आठवें नंबर पर गए जेम्स इरविन का निधन सबसे पहले हुआ था। जेम्स इरविन वर्ष 1972 में नासा से रिटायर्ड हुए थे। उन्होंने ईसाई धार्मिक आउटरीच संगठन हाई फ्लाइट फाउंडेशन की स्थापना की। उनकी मौत हार्ट अटैक से वर्ष 1991 में जब हुई तब वह 61 साल के थे। इस वजह...