चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती हैं...
अंग्रेजी में कहते हैं- You can't judge #1EK book by its cover अर्थात जैसे किसी आवरण से पुस्तक के विषय में पूरी तरह समझा नहीं जा सकता ठीक वैसे ही चीजें हमेशा वैसी नहीं होतीं, जैसी दिखती हैं...! खाने में तैलीय भोजन छूने से बहुत चिकना लगता है लेकिन शरीर में पहुंचने के बाद यही चिकनाहट हानिकारक साबित होती है। यदि किन्हीं कारणों से जैसे आजकल का जीवन है... व्यक्ति मेहनत नहीं कर पाता है तो उससे पूछिएगा कि ऐसा भोजन उसके लिए कितना कष्टकारक होता है...! इसके विपरीत सूखा भोजन शरीर में पचने में थोड़ा बेहतर रहता है। इससे स्पष्ट होता है कि कुछ चीजें जैसे दिखती हैं, वैसी होती नहीं हैं। इसलिए किसी भी चीज की बाहरी बनावट से उसके गुण व अवगुण के बारे में पूर्णतया अनुमान नहीं लगाया जा सकता। जैसे- अध्यात्म पर चर्चा की जाए तो सनातन धर्म में ईश्वर को सगुण और निर्गुण माना गया है। कहते हैं कि ईश्वर साकार रूप में है और वह निराकार भी है और वह इन दोनों से भी परे है। जैसे शिवजी के बारे में कहा जाता है कि वही शून्य है, वही इकाय, जिसके भीतर बसा शिवाय। हम ईश्वर को किसी सीमा में नहीं बांध सकते हैं यानी वह अनंत है......