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#टमाटर के दामों में उछाल... आजमाएं यह #1EK रास्ता

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आज भारत में टमाटर के भाव बढ़ने से कहा जा रहा है कि यह लाल हो गया है... लाल बोले तो खतरे का निशान.... लेकिन जनाब.. पका टमाटर हमेशा से लाल ही रहा है। लेकिन जब इसके दाम आसमान छूने लगते हैं तो मीडिया इसे इनवर्टेड कॉमस में लाल लिखना शुरू कर देता है...! इसके दाम बढ़ गए हैं... कारणों की पड़ताल की जाती है लेकिन #1EK भी ऐसा मीडिया समूह नहीं होता, जो इसका रास्ता दिखाता हो कि आगे यह महंगा न हो, इसके लिए किसानों को और आम आदमियों को क्या करना चाहिए? गौरतलब है कि कई बार ज्यादा पैदावार के चलते टमाटर की कीमत इतनी गिर जाती हैं कि किसान इन्हें फेंकना सस्ता समझते हैं और जब यही आवक मांग के अनुरूप कम हो जाती है तो इसके दाम आसमान छूने लगते हैं। यह तो बाजार का नियम है कि मांग ज्यादा और आवक कम तो दाम बढ़ना तय है और मांग कम और आवक ज्यादा तो दाम गिर जाता है। दाम गिरते हैं तो किसानों की मेहतन खराब हो जाती है और दाम चढ़ते हैं तो कम ही किसानों को इसका लाभ मिलता है। यही हालात बदले, इस ओर सरकार को ध्यान देना चाहिए। इसके लिए सब्जियों को स्टोर करने की बेहतर व्यवस्था करनी होगी, जो किसानों के साथ जनता की जेब के लिए भी ...

तब मोदी जी अम‌ेरिका में #1EK आम भारतीय थे...

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"We the People..." से भारत और अमेरिका के संविधान की प्रस्तावना शुरू होती है और जीवन #1EK इत्तफाक है.... यही सच है...! समय की बात है... आज भारतीय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी अमेरिका की राजकीय यात्रा पर हैं और इस समय मीडिया हलकों में इसकी जबरदस्त चर्चाएं हो रही हैं। गुरुवार यानी 22 जून को अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडन ने उनका भव्य स्वागत किया तो प्रवासी भारतीयों ने मोदी जी के समर्थन में नारे लगाए। इस दौरान प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी लगभग तीन दशक पुरानी उस यात्रा का जिक्र भी किया जब वह आम भाजपा कार्यकर्ता के तौर पर अमेरिकी प्रवास पर गए थे। तब उन्होंने आम भारतीय की तरह व्हाइट हाउस के बाहर खड़े होकर फोटो भी खिंचवाई थी और तीन दशक के बाद पूरा अमेरिका आज उनके स्वागत के लिए पलक पावड़े बिछाए नजर आ रहा था। गौतलब है कि अमेरिकी विदेश विभाग और अमेरिकी युवा राजनीतिक नेताओं की परिषद अन्य देशों के युवा नेताओं की अप्रोच समझने के लिए वहां के नेताओं को बुलाती है। इसी क्रम में नरेंद्र मोदी (तब के बीजेपी के युवा नेता ) को अमेरिकन कॉउंसिल ऑफ यंग पॉलिटिकल लीडर्स के कार्यक्रम में बुलाया गया था। तब मोदी...

शिवलिंग की तरह दिखता है काबा का काला पत्थर...!

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दुनिया में सबसे प्रचलित तथ्य है.... ईश्वर #1EK है लेकिन इसके बावजूद वैचारिक भिन्नता की वजह से लोग #1EK-दूसरे के दुश्मन नजर आते हैं। सनातन धर्म में जहां कई तरह की पूजा पद्धतियां है वहीं अन्य मजहबों में #1EK दिशा में चलने वाले लोग हैं। कुछ जगहों पर उनमें मतभिन्नता भले हो लेकिन उनके नियम-कायदों का पालन ही उन्हें कट्टर बनाता है। जैसे शिवलिंग की तरह काबा का काला पत्थर भी दिखता है लेकिन विरोध... कायम है...! दूसरी महत्वपूर्ण बात, खुद को धार्मिक रूप से श्रेष्ठ समझने की जिद ने सामाजिक ताने-बाने को काफी नुकसान पहुंचाया है। जैसे कई लोग कहते हैं- अहम् ब्रह्मास्मि यानि मै ब्रह्मस्वरूप हूँ। स्पष्ट है कि शब्दों को ब्रह्म कहा गया है और ब्रह्म तो #1EK है और हमारे पास जीवन भी #1EK है लेकिन हम #1EK की थ्योरी को समझना नहीं चाहते। सनातन धर्म में स्पष्ट कहा गया है कि एको ब्रह्म द्वितीयो नास्ति और मुस्लिमों का मानना है कि इस्लाम के अनुसार अल्लाह ही #1EK मात्र ईश्वर है। इस प्रकार भाषा भले जुदा हो लेकिन अर्थ #1EK ही निकलता दिखता है लेकिन शब्दों के खेल निराले हैं। हर कोई अपने अनुसार, मतलब गढ़ना चाहता है। जैस...

अल्लाह के कम से कम हैं 99 नाम...!

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गूगल से #1EK प्रश्न पूछो- इस्लाम का अर्थ क्या होता है? उत्तर मिलेगा- इस्लाम शब्द का अर्थ है: 'अल्लाह को समर्पण'; इस प्रकार मुसलमान वह है, जिसने अपने आपको अल्लाह को समर्पित कर दिया यानी कि इस्लाम धर्म के नियमों पर चलने लगा। इस्लाम धर्म का आधारभूत सिद्धांत अल्लाह को सर्वशक्तिमान, एकमात्र ईश्वर और जगत का पालक और हजरत मुहम्मद को उनका संदेशवाहक या पैगम्बर मानना है। इसी प्रकार इस्लाम में अल्लाह के कितने नाम है... प्रश्न का जवाब मिला... हदीस के अनुसार, इस्लाम में ईश्वर (अल्लाह) के कम से कम 99 नाम हैं, जिन्हें' अस्माउ अल्लाहि अल-हुसना बोले तो ‘अल्लाह के सुंदर नाम’ के रूप में जाना जाता है। इस्लाम के पैग़म्बर मुहम्मद साहब ने हदीस में कई नामों से अल्लाह को बुलाया है। मुस्लिमों का मानना है कि इस्लाम के अनुसार अल्लाह ही #1EK मात्र ईश्वर है लेकिन जब स्वयं इस्लाम के पैगंबर हजरत मुहम्मद उसके कम से कम 99 नाम का जिक्र करते हैं तो कट्टरता काहे की...? जैसे ही हम मानते हैं कि ईश्वर #1EK है... तो यह सिद्धांत एकेश्वरवाद कहलाता है। ईसाई और यहूदी धर्म में भी यही माना जाता है। अब सनातन की बात करे...

चर्चा में भारत का #1EK राजदंड बोले तो #सेंगोल

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प्राचीन भारत की कहानियों में राजदंड की चर्चा मिलती रही है लेकिन आधुनिक भारत में भी भारत का #1EK राजदंड बोले तो #सेंगोल इस समय जबरदस्त ट्रेंड कर रहा है। दरअसल, केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने स्वतंत्रता के एक 'महत्वपूर्ण ऐतिहासिक' प्रतीक के तौर पर #सेंगोल (राजदंड) की प्रथा को पुनः शुरू करने की भी घोषणा की है। उनका कहना है यह अंग्रेजों से भारतीयों को सत्ता के हस्तांतरण का प्रतीक रहा है। नए संसद भवन के उद्घाटन से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी तमिलनाडु से #सेंगोल प्राप्त करेंगे और वह इसे नए संसद भवन के अंदर रखेंगे। इसे स्पीकर की सीट के पास रखे जाने की तैयारी है। उनका कहना है कि नया संसद भवन हमारे इतिहास, सांस्कृतिक विरासत, परंपरा और सभ्यता को आधुनिकता से जोड़ने का सुंदर प्रयास है। इस अवसर पर एक ऐतिहासिक परंपरा पुनर्जीवित हो रही है। गृहमंत्री अमित शाह ने कहा- 'इस पवित्र सेंगोल को किसी संग्रहालय में रखना अनुचित है। सेंगोल की स्थापना के लिए संसद भवन से अधिक उपयुक्त, पवित्र और उचित स्थान कोई हो ही नहीं सकता इसलिए जब संसद भवन देश को समर्पण होगा, उसी दिन प्रधानमंत्री मोदी बड़ी विन...

प्रचलन में रहा 2000 का गुलाबी नोट अब हुआ ‘लाल’

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सरकार के 2000 रुपये के नोट को प्रचलन से बाहर करने की घोषणा के बाद से यह गुलाबी नोट अब खतरे की घंटी के प्रतीक ‘लाल’ रंग जैसा लोगों को नजर आने लगा है। हालांकि अभी घबराने की कोई बात नहीं है क्योंकि आम लोग आगामी 30 सितंबर तक इसे बैंकों में जमा करवा सकते हैं। मुद्राओं में 2000 का यह ब्रांड अब कुछ समय बाद सिर्फ ‘नाम’ के तौर पर हमारी यादों में जिंदा ही रहेगा। आम लोग परेशान न हों। 2000 के नोट से जुड़े सवालों के उत्तर इस प्रकार हैं ः- ये बैंक नोट वापस क्यों लिए जा रहे हैं? वर्ष 2016 नवंबर में इस गुलाबी नोट का जन्म हुआ था। मकसद था कि 500 और 1000 रुपये के नोटों को वापस लेने के बाद अर्थव्यवस्था को गति देना। परिणाम अपेक्षानुरूप आए और इसके बाद 2018-19 में इनकी छपाई बंद कर दी गई। ज्यादातर ये नोट मार्च 2017 से पहले जारी किए गए थे। चूंकि प्रचलन में धीरे-धीरे ये नोट बाहर होते गए और इनका जीवन काल भी चार-पास साल ही था, सो अब सरकार ने भारतीय रिजर्व बैंक की 'क्लीन नोट नीति' के अनुसार, इन्हें चलन से बाहर करने का निर्णय लिया। अब आपका प्रश्न होगा कि क्लीन नोट नीति क्या होती है? तो सरल भाषा में ज...

#1EK फिल्म 'द केरल स्टोरी' ....

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जब आप सिनेमा देखते हैं तो... और कहानी मन को भाने लगे तो आप सिर्फ देखते हैं... आपका दिमाग भी उसी कहानी के साथ खुद को जुड़ा हुआ पाता है... #1EK किरदार के तौर पर आप भी फिल्म का हिस्सा बन जाते हैं और... जब फिल्म खत्म होती है.. बोले तो The End.... तो आपको लगता है कि आपकी यात्रा पूरी हो गई और आप वापस अपनी जद्दोजहद की दुनिया में लौट आते हैं। लेकिन जिंदगी में #1EK इत्तफाक भारी बदलाव ला सकता है, the keral story इसी प्रकार की कहानी है! फिल्म की जैसी कहानी होती है... हमारे भाव भी वैसे ही हो जाते हैं... कभी हम हंसने लगते हैं तो कभी-कभी हमारी आंखों आंसू भी निकल जाते हैं... जीतता हीरो है और लगता है कि हम जीत गए। विलेन को कुटता देखने से लगता है कि हमारी ताकत दोगुनी हो गई है और हम दांत पीसते हुए.... लगता है कि हम ही उसे मार रहे हैं... यही है मनोरंजन की दुनिया...। फिल्म सच में ब्लाइंड मीडिया है... खासकर जब आप सिनेमाघरों में होते हैं। वहां का अंधेरा हमें ऐसी दुनिया में ले जाता है जहां हम खो जाते हैं। #1EK खिड़की से निकल रहा प्रकाश हमें नए संसार की सैर करवा रहा होता है। अब मुद्दे की बात... आजकल फि...